স্বামী ভোলানাথজী বেদান্তভূষণ

কোন সৈনিক কর্মশেষে স্ত্রী-পুত্রাদি সঙ্গে নিয়ে জলপথে দেশে ফিরছিল। পথে উঠল ভীষণ ঝড়। ঝড়ের বেগ প্রতিমুহূর্তেই বাড়তে লাগল। ক্রমে উহা প্রচণ্ড আকার ধারণ করল। নৌকার আরোহীরা সবাই ভয়ানক কান্নাকাটি জুড়ে দিল। ঐ সৈনিকের স্ত্রীও অত্যন্ত ভীত হয়ে চেঁচামেচি করতে লাগল।

সেই সৈনিক ছিল একজন ভগবদ্ভক্ত। আর তার…

শ্রীরামকৃষ্ণ (সহাস্যে) — নানা শাস্ত্র জানলে কি হবে। ভবনদী পার হতে জানাই দরকার। ঈশ্বরই বস্তু আর সব অবস্তু।

“লক্ষ্য ভেদের সময় দ্রোণাচার্য অর্জুনকে জিজ্ঞাসা করলেন, ‘তুমি কি কি দেখতে পাচ্ছ? এই রাজাদের কি তুমি দেখতে পাচ্ছ?’ অর্জুন বললেন, ‘না’। ‘আমাকে দেখতে পাচ্ছ?’ — ‘না’। ‘গাছ দেখতে পাচ্ছ?’ — ‘না’। ‘গাছের উপর পাখি দেখতে পাচ্ছ?’ — ‘না’। ‘তবে কি দেখতে পাচ্ছ?’ — ‘শুধু পাখির চোখ।’

“যে শুধু পাখির চোখটি দেখতে পায় সেই লক্ষ্য বিঁধতে পারে।

“যে কেবল দেখে, ঈশ্বরই বস্তু আর সব অবস্তু, সেই চতুর। অন্য খবরে আমাদের কাজ কি? হনুমান বলেছিল, আমি তিথি নক্ষত্র অত জানি না, কেবল রাম চিন্তা করি।

১৮৮৪, ২৪শে ফেব্রুয়ারি

https://www.ramakrishnavivekananda.info/kathamrita/unicodekathamrita/20_l_at_dakshineshwar_388_390.html

वाचो वेगं मनसः क्रोधवेगं जिह्वावेगमुदरोपस्थवेगम् ।
एतान्वेगान्यो विषहेत धीरः सर्वामपीमां पृथिवीं स शिष्यात् ॥ १ ॥

अत्याहारः प्रयासश्च प्रजल्पो नियमाग्रहः ।
जनसङ्गश्च लौल्यं च षड्भिर्भक्तिर्विनश्यति ॥ २ ॥

उत्साहान्निश्चयाद्धैर्यात्तत्तत्कर्मप्रवर्तनात् ।
सङ्गत्यागात्सतो वृत्तेः षड्भिर्भक्तिः प्रसिध्यति ॥ ३ ॥

ददाति प्रतिगृह्णाति गुह्यमाख्याति पृच्छति ।
भुङ्क्ते भोजयते चैव षड्विधं प्रीतिलक्षणम् ॥ ४ ॥

परव्यसनिनी नारी व्यग्रापि ग्रहकर्मणि।
तदेवास्वादयत्यन्तः परसङ्गरसायनम् ॥

अन्वयः - पर-व्यसनिनी नारी ग्रह-कर्मणि व्यग्रा अपि
अन्तः तत् एव पर-सङ्ग-रसायनम् आस्वादयति

जैसे कुलटा स्त्री पति के गृहकर्म में लगी रहकर भी अपने अन्तर में उपपति के संगसुख का रसास्वादन करती रहती है, उसी प्रकार बाहर से संसार के कार्यों में व्यस्त रहकर भी मन को भगवान् में लगाए रखना चाहिए।

(योगवासिष्ठ, उपशमप्रकरण ७४, ८३)

It is a tremendous error to feel helpless. Do not seek help from anyone. We are our own help. If we cannot help ourselves, there is none to help us. ‘Thou thyself art thy only friend, thou thyself thy only enemy. There is no other enemy but this self of…

सीता राम सीता राम सीताराम कहिये,
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये |
मुख में हो राम नाम राम सेवा हाथ में,
तू अकेला नाहिं प्यारे राम तेरे साथ में |
विधि का विधान जान हानि लाभ सहिये,
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये ||
किया अभिमान तो फिर मान नहीं पायेगा,
होगा प्यारे वही जो श्री रामजी को भायेगा |
फल आशा त्याग शुभ कर्म करते रहिये,
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये ||
ज़िन्दगी की डोर सौंप हाथ दीनानाथ के,
महलों मे राखे चाहे झोंपड़ी मे वास दे |
धन्यवाद निर्विवाद राम राम कहिये,
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये ||
आशा एक रामजी से दूजी आशा छोड़ दे,
नाता एक रामजी से दूजे नाते तोड़ दे |
साधु संग राम रंग अंग अंग रंगिये,
काम रस त्याग प्यारे राम रस पगिये ||

ਗੁਰ ਸਤਿਗੁਰ ਕਾ ਜੋ ਸਿਖੁ ਅਖਾਏ ਸੁ ਭਲਕੇ ਉਠਿ ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਧਿਆਵੈ ॥
ਉਦਮੁ ਕਰੇ ਭਲਕੇ ਪਰਭਾਤੀ ਇਸਨਾਨੁ ਕਰੇ ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਸਰਿ ਨਾਵੈ ॥

ਉਪਦੇਸਿ ਗੁਰੂ ਹਰਿ ਹਰਿ ਜਪੁ ਜਾਪੈ ਸਭਿ ਕਿਲਵਿਖ ਪਾਪ ਦੋਖ ਲਹਿ ਜਾਵੈ ॥
ਫਿਰਿ ਚੜੈ ਦਿਵਸੁ ਗੁਰਬਾਣੀ ਗਾਵੈ ਬਹਦਿਆ ਉਠਦਿਆ ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਧਿਆਵੈ ॥

ਜੋ ਸਾਸਿ ਗਿਰਾਸਿ ਧਿਆਏ ਮੇਰਾ ਹਰਿ ਹਰਿ ਸੋ ਗੁਰਸਿਖੁ ਗੁਰੂ ਮਨਿ ਭਾਵੈ ॥
ਜਿਸ ਨੋ ਦਇਆਲੁ ਹੋਵੈ ਮੇਰਾ ਸੁਆਮੀ ਤਿਸੁ ਗੁਰਸਿਖ ਗੁਰੂ ਉਪਦੇਸੁ ਸੁਣਾਵੈ ॥

ਜਨੁ ਨਾਨਕੁ ਧੂੜਿ ਮੰਗੈ ਤਿਸੁ ਗੁਰਸਿਖ ਕੀ ਜੋ ਆਪਿ ਜਪੈ ਅਵਰਹ ਨਾਮੁ ਜਪਾਵੈ ॥੨॥

https://youtu.be/-j6RWnvjozY

It is not true that I am against any religion. It is equally untrue that I am hostile to the Christian missionaries in India. But I protest against certain of their methods of raising money in America. What is meant by those pictures in the school-books for children where…

Sandeep Nangia

When 280 chars on https://twitter.com/SNChd are too less or too ephemeral and writing on http://nangia.in is too much work

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